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रविवार, 17 जनवरी 2016

Reading Master and Margarita (Hindi) - 22

अध्याय 22

शमा की रोशनी में


इस अध्याय का शीर्षक है ‘शमा की रोशनी में’, क्योंकि अजूबों की दुनिया में मार्गारीटा का पदार्पण होता है मोमबत्ती की रोशनी में.

जिस कार में मार्गारीटा को वापस मॉस्को लाया जा रहा था, उसे एक पंछी ड्राइवर चला रहा था. उसे दोरोगोमीलोवो भाग में एक सुनसान कब्रिस्तान के निकट उतारकर पंछी ड्राइवर ने कार का एक पहिया निकाला, उस पर सवार हुआ और गायब हो गया. जाने से पहले उसने कार को एक गहरी खाई में धकेल दिया, जहाँ वह एक विस्फोट के साथ जल गई.

एक कब्र के पीछे से एक काला रेनकोट प्रकट होता है, जिसमें अज़ाज़ेलो है. उसने इशारे से मार्गारीटा को उसके ब्रश पर बैठने को कहा, वह स्वयँ भी कूदकर उस पर बैठ गया और वे दोनों बिना किसी को दिखे ज़ूs s s म से उड़ चले. कुछ ही पल बाद वे सादोवाया रास्ते पर बिल्डिंग नंबर 302 के पास उतरे और चल पड़े फ्लैट नं. 50 की ओर. तो, फ्लैट नं. 50 अब एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है.

चलते चलते वे तीन आदमियों को देखते हैं जो देखने में बिल्कुल एक जैसे लग रहे थे, मानो एक दूसरे की प्रतिकृतियाँ हों. ये तीनों आदमी उस बिल्डिंग पर और फ्लैट नं. 50 पर नज़र रख रहे थे. कृपया ध्यान दें कि इन तीनों आदमियों की अपनी कोई पहचान नहीं थी, वे बड़े यांत्रिक तरीके से अपना काम कर रहे थे...उन्हें एक दूसरे की प्रतिकृतियाँ तो होना ही था!

अज़ाज़ेलो ने अपनी चाभी से दरवाज़ा खोला.

कमरे में प्रवेश करते ही मार्गारीटा को जिस बात ने चौंकाया वह था उस जगह का आकार-प्रकार और वहाँ छाया हुआ अँधेरा. उसे ऐसा महसूस हुआ मानो वह एक सीढ़ियों वाले अंतहीन हॉल में है, जहाँ बड़े बड़े स्तम्भों की कतार है और घुप अन्धेरा छाया हुआ है. वह इस बात पर अचरज कर ही रही थी कि मॉस्को के साधारण फ्लैट में इतना सब कैसे समा सकता है, तभी उसने देखा कि एक आदमी हाथ में मोमबत्ती पकड़े हॉल की सीढ़ियाँ उतरते हुए उनके पास आ रहा है. यह कोरोव्येव था.

कोरोव्येव मार्गारीटा को समझाता है कि जिन्हें पाँचवे आयाम का ज्ञान है उनके लिए किसी भी छोटी जगह को मनचाहा आकार देना बहुत आसान है. उसने उसे मॉस्को के एक दुःसाहसी व्यक्ति का उदाहरण दिया जिसने बगैर किसी आयाम-वायाम के ज्ञान के अपने फ्लैट्स में पार्टीशन्स खड़े कर करके कमरों की संख्या को बढ़ा लिया और फिर उन्हें निरंतर बड़े फ्लैट्स से बदलता रहा. मगर अधिकारियों को उसके कारनामों का पता चल गया और उसकी गतिविधियों का अंत हो गया.

कोरोव्येव मार्गारीटा को समझाता है कि उसे यहाँ क्यों बुलाया गया है:          
चलिए, काम की बातें करें, काम की बातें, मार्गारीटा निकोलायेव्ना! आप बहुत बुद्धिमान महिला हैं, और, बेशक, समझ गई हैं, कि हमारा मालिक कौन है.
मार्गारीटा का दिल धक् हो गया. उसने अपना सिर हिला दिया.
 वही, वही तो... कोरोव्येव बोला, हम सभी छिपाने के और रहस्यों के दुश्मन हैं. हर साल हमारे मालिक एक बॉल (नृत्योत्सव) का आयोजन करते हैं. इसे बसंत पूर्णिमा का या शतनृप नृत्योत्सव कहते हैं. ऐसी भीड़! अब कोरोव्येव ने गाल पर हाथ रख लिया, मानो उसका दाँत दर्द कर रहा हो, ख़ैर, मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको खुद भी विश्वास हो जाएगा. तो, बात यह है कि मालिक कुँआरे हैं जैसा कि आप ख़ुद ही समझ रही हैं, मगर महिला मेज़बान तो होना ही चाहिए, कोरोव्येव ने हाथ हिलाते हुए कहा, आप ख़ुद ही जानती हैं कि मालकिन के बिना...
मार्गारीटा एक-एक शब्द ध्यान से सुन रही थी: उसके दिल को बड़ी ठण्डक मिल रही थी; सुख की कल्पना से उसका सिर घूम रहा था.
 यह प्रथा पड़ गई है, कोरोव्येव आगे बोला, कि नृत्योत्सव की मेज़बान का नाम मार्गारीटा ही होना चाहिए, यह तो हुई पहली बात; और दूसरी यह कि वह स्थानीय निवासी होना चाहिए; और जैसा कि आप देख रही हैं, हम हमेशा सफर करते रहते हैं और इस समय मॉस्को में हैं. हमें मॉस्को में एक सौ इक्कीस मार्गारीटा मिलीं, मगर विश्वास कीजिए, कोरोव्येव ने अपनी जाँघ पर हाथ मारते हुए कहा, एक भी इस लायक नहीं निकली. अब, आख़िर में, सौभाग्य से...
कोरोव्येव अर्थपूर्ण ढंग से हँसा, बिल्कुल संक्षेप में...आप इस ज़िम्मेदारी से इनकार तो नहीं करेंगी?
 नहीं करूँगी, मार्गारीटा ने दृढ़तापूर्वक उत्तर दिया.
 बेशक! कोरोव्येव ने कहा, और लैम्प उठाकर बोला, कृपया मेरे पीछे-पीछे आइए.

मार्गारीटा को वोलान्द के पास ले जाया जाता है. वोलान्द को विश्वास हो जाता है कि मार्गारीटा एक बुद्धिमान और सलीकापसन्द महिला है.

वोलान्द का वर्णन करने के बाद बुल्गाकोव उसके घुटने के दर्द का वर्णन करता है, जो उसे तब से था जब उसे स्वर्ग से बाहर फेंक दिया गया था.

बुल्गाकोव रेडियो पर समाचार पढ़ने वाली लड़कियों का मखौल उड़ाता है जिनके उच्चारण सही नहीं होते.

मार्गारीटा का ध्यान वोलान्द के पलंग के पास रखे एक ग्लोब की ओर आकर्षित होता है, जो बिल्कुल वास्तविक नज़र आ रहा था. ग्लोब में दुनिया में घटित हो रही घटनाएँ स्पष्ट नज़र आ रही थीं. उसे अबादोना भी दिखाया जाता है, जो मौत का फ़रिश्ता है.

मार्गारीटा को वोलान्द की टीम पसन्द आ गई जिसमें शामिल थे अज़ाज़ेलो, कोरोव्येव, सुन्दरी हैला और बेगेमोत.

अब वे सभी नृत्योत्सव के लिए तैयार हो रहे थे जो अर्ध रात्रि में आरम्भ होने वाला था.

हम मार्गारीटा के साथ ही रहेंगे!


सोमवार, 11 जनवरी 2016

Reading Master and Margarita (Hindi) - 21

अध्याय 21

 उड़ान


 यह अध्याय आरम्भ होता है मार्गारीटा की बिदाई से – उसके आलीशान भवन से, उसकी पुरानी ज़िन्दगी से; और समाप्त होता है - उसके वापस मॉस्को में, अनजान विदेशी के घर में आगमन से.
पिछले अध्याय में हम देख चुके हैं कि मार्गारीटा चुडैल बन चुकी है. ऊर्जा और उत्सुकता से भरपूर...वह अपने रास्ते की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है.

वह अभी तक विदेशी के घर में नहीं पहुँची है, मगर उसके आगमन की सारी औपचारिकताएँ, जैसे कि समारोह पूर्वक स्नान करवाना, चुड़ैलों द्वारा किया गया शानदार स्वागत-नृत्य, शानदार ऑर्केस्ट्रा पर बजाया गया संगीत आदि पूरी कर ली गई हैं. अब वह शारीरिक और मानसिक रूप से एक नये जीवन में प्रवेश करने के लिए तैयार है!

अभी शुक्रवार की रात ही चल रही है. ऐसा लगता है, मानो हम समय की गिनती ही भूल गए हों...इतने थोड़े समय में इतनी सारी घटनाएँ हो रही हैं....प्रकृति के रहस्य मार्गारीटा के सामने खुलते जाते हैं...

ब्रश पर सवार मार्गारीटा नदी की ओर प्रस्थान करते हुए कुछ स्थानों पर रुकती है. लातून्स्की के फ्लैट में घुसकर वह उसकी हर चीज़ नष्ट कर देती है. वह अदृश्य रूप से जो उड़ रही है...वह लेखकों और नाटककारों की इमारत के कई फ्लैट्स में घुसती है...उसका गुस्सा धीरे धीरे कम हो रहा है...ड्रामलिट की इमारत को पूरी तरह तहस-नहस करने के बाद उसे कुछ सुकून मिलता है...आख़िर उसने मास्टर को पीड़ा पहुँचाने वालों को दण्डित जो कर दिया था.

नदी की ओर जाते हुए रास्ते में उसकी मुलाक़ात नताशा से भी होती है, जो मार्गारीटा की ही तरह चुडैल बन चुकी है. वह एक सुअर पर सवार है, यह सुअर कोई और नहीं बल्कि निकोलाय इवानोविच था. निकोलाय इवानोविच मारारीटा की कमीज़ लौटाने ऊपर गया था, जो मार्गारीटा ने अपने फ्लैट से उड़ते हुए उसके मुँह पर फेंकी थी.

मार्गारीटा के शयन कक्ष में प्रवेश करते ही उसे विवस्त्र नताशा नज़र आई जो कमरे में उड़ रही थी. नताशा ने बची हुई क्रीम अपने बदन पर मल ली थी. निकोलाय इवानोविच उसे ‘वीनस’ कह कर संबोधित करता है, अपने प्यार का इज़हार करता है और शादी का प्रस्ताव रखता है. नताशा ने निकोलाय इवानोविच के गंजे सिर पर भी थोड़ी सी क्रीम मल दी थी. क्रीम मलते ही वह सुअर के रूप में परिवर्तित हो जाता है. नताशा उसकी पीठ पर सवार होकर उड़ चली. निकोलाय इवानोविच ने अपने मुँह में ब्रीफकेस पकड़ रखी है जिसमें उसके महत्त्वपूर्ण कागज़ात हैं...

मार्गारीटा नदी के किनारे पर पहुँचती है...उसका बड़े शानदार तरीक़े से स्वागत किया जाता है...और उसे एक कार में बैठाकर विदेशी के पास ले जाया जाता है!

बुल्गाकोव बड़ी ख़ूबसूरती से मार्गारीटा की मनोदशा के विभिन्न पहलुओं का चित्रण करते हैं...मार्गारीटा की उड़ान का वर्णन पाठकों को पूरी तरह सम्मोहित कर देता है...उसके साथ-साथ चलता हुआ पूनम का तनहा, पूरा चाँद... जादुई नदियाँ जो आसमान से देखने पर म्यान में रखी तलवारों की तरह प्रतीत होती हैं...मैपल वृक्षों के मदहोश करते जंगल....नदी का निस्तब्ध, ख़ामोश किनारा...इस पवित्र, शांत वातावरण को चीरती की नताशा की खिलखिलाहट और उसका तीखा जवाब कि उसे भी अपनी मालकिन की तरह उड़ने का हक है, इसीलिए उसने अपने शरीर पर क्रीम मल ली थी. मुस्कुराता, ख़ुशमिजाज़ , नग्न मोटा जो एनिसेई  से आया था मार्गारीटा को रानी मार्गो कहकर सम्बोधित करता है. उसीसे पाठकों को यह पता चलता है कि मार्गारीटा को ये सारी चुडैलें और एक दूसरी दुनिया के बाशिन्दे ‘महारानी मार्गो’ के रूप में जानते हैं. उसका बर्ताव भी गरिमामय और शाही हो जाता है.

रहस्यमय विदेशी से मार्गारीटा की मुलाक़ात अगले अध्याय में होगी और कई सारी अविश्वसनीय घटनाएँ होंगी...



हम मार्गारीटा के साथ साथ रहेंगे...

गुरुवार, 7 जनवरी 2016

Reading Master and Margarita (Hindi) - 20

अध्याय 20

अज़ाज़ेलो की क्रीम


तो, शुक्रवार की शाम है...

मार्गारीटा बड़ी बेसब्री से घड़ी की ओर देख रही है. उसके सामने अज़ाज़ेलो द्वारा दी गई क्रीम की डिबिया पड़ी है.

जैसे ही साढ़े नौ बजे, मार्गारीटा का दिल बुरी तरह धड़क उठा, जिससे वह एकदम डिब्बी न उठा सकी. अपने आप पर काबू पाते हुए उसने डिब्बी को खोला और देखा कि उसमें पीली, चिकनी क्रीम थी. उसे लगा कि उसमें से दलदली कीचड़ की गन्ध आ रही है. ऊँगली की नोक से मार्गारीटा ने थोड़ी-सी क्रीम निकालकर हथेली पर रखी, अब उसमें से दलदली घास और जंगल की तेज़ महक आने लगी. वह हथेली से माथे और गालों पर क्रीम मलने लगी.

क्रीम बड़ी जल्दी बदन पर मला जा रहा था. मार्गारीटा को ऐसा लगा कि वह तभी भाप बनकर उड़ रहा है. कुछ देर मलने के बाद मार्गारीटा ने शीशे में देखा और उसके हाथ से डिब्बी छूटकर घड़ी पर जा गिरी. घड़ी के शीशे पर दरारें पड़ गईं. मार्गारीटा ने आँखें बन्द कर लीं. फिर उसने अपने आपको दुबारा आईने में देखा और ठहाका मारकर हँस पड़ी.

किनारों पर धागे की तरह पतली होती गई उसकी भवें क्रीम के कारण मोटी-मोटी हो गई थीं और हरी-हरी आँखों पर विराजमान थीं. पतली-सी झुर्री जो नाक की बगल में तब, अक्टूबर में, बन गई थी, जब मास्टर गुम हो गया था, अब बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही थी. कनपटी के निकट के पीले साये भी गायब हो गए थे. साथ ही आँखों के किनारों पर पड़ी जाली भी अब नहीं थी. गालों की त्वचा गुलाबी हो गई थी. माथा साफ़ और सफ़ेद हो गया था, बाल खुल चुके थे.

तीस वर्षीया मार्गारीटा को आईने से देख रही थी काले, घुँघराले बालों वाली, दाँत दिखाकर बेतहाशा हँसती हुए एक बीस साल की छोकरी.

हँसना ख़त्म करके मार्गारीटा ने एक झटके से गाऊन फेंक दिया और अपने पूरे बदन पर जल्दी-जल्दी क्रीम मलने लगी. बदन गुलाबी होकर चमकने लगा. फिर मानो किसी ने सिर में चुभी हुई सुई बाहर निकाल फेंकी हो. उसकी कनपटी का दर्द गायब हो गया जो कल शाम से अलेक्सान्द्रोव्स्की पार्क में शुरू हुआ था. हाथों-पैरों के स्नायु मज़बूत हो गए, फिर मार्गारीटा का बदन हल्का हो गया.

वह उछली और पलंग से कुछ ऊपर हवा में तैरने लगी. फिर जैसे उसे कोई नीचे की ओर खींचने लगा और वह नीचे आ गई.

 क्या क्रीम है! क्या क्रीम है! मार्गारीटा कुर्सी में बैठते हुए बोली.

इस लेप से उसमें केवल बाहरी परिवर्तन ही नहीं हुआ था. अब उसके समूचे अस्तित्व में, शरीर के हर कण में प्रसन्नता हिलोरें ले रही थी, जिसका वह हर क्षण अनुभव कर रही थी, मानो बुलबुलों के रूप में यह खुशी उसके बदन से फूटी पड़ रही थी. मार्गारीटा ने अपने आपको स्वतंत्र अनुभव किया, सब बन्धनों से मुक्त. इसके अलावा वह समझ गई, कि वह हो गया है, जिसका आभास उसे सुबह हुआ था, और अब वह ख़ूबसूरत घर और अपनी पुरानी ज़िन्दगी को हमेशा के लिए छोड़ देगी.

मगर इस पुरानी ज़िन्दगी से एक ख़याल उसका पीछा कर रहा था, वह यह कि एक आख़िरी कर्त्तव्य पूरा करना है इस नए, अजीब, ऊपर, हवा में खींचते हुए कुछ के घटित होने से पहले. और वह, वैसी ही निर्वस्त्र अवस्था में, शयनगृह से हवा में तैरते-उतरते हुए अपने पति के कमरे में पहुँची और टेबुल लैम्प जलाकर लिखने की मेज़ की ओर लपकी. सामने पड़े राइटिंग पैड से एक पन्ना फ़ाड़कर उस पर बड़े-बड़े अक्षरों में पेंसिल से लिखा:

 “मुझे माफ़ करना और जितनी जल्दी हो सके, भूल जाना. मैं तुम्हें हमेशा के लिए छोड़कर जा रही हूँ. मुझे ढूँढ़ने की कोशिश मत करना, कोई फ़ायदा नहीं होगा. मैं हमेशा सताने वाले दुःखों और मुसीबतों के कारण चुडैल बन गई हूँ. अब मैं चलती हूँ. अलबिदा!
मार्गारीटा.

इस अध्याय में दो पात्र और हैं: मार्गारीटा की नौकरानी नताशा, और मार्गारीटा के आलीशान घर की निचली मंज़िल पर रहने वाला निकोलाय इवानोविच.

मार्गारीटा का नताशा के साथ काफ़ी दोस्ताना किस्म का बर्ताव है:

 एकदम हल्के मन से मार्गारीटा हवा में तैरती हुई शयन-गृह में आई और उसके पीछे-पीछे दौड़ती हुई आई नताशा, अनेक चीज़ों से लदी-फँदी. और ये सारी चीज़ें हैंगरों में टँगी अनेक पोशाकें, लेस वाले रूमाल, नीले रेशमी जूते, और बेल्ट, सभी ज़मीन पर बिखर गईं. और नताशा ख़ाली हाथों से तालियाँ बजाने लगी.
 क्यों, अच्छा है न? भारी आवाज़ में मार्गारीटा निकोलायेव्ना चिल्लाई.
 यह क्या है? नताशा एड़ियों के बल चलती हुई फुसफुसाई, आप यह कैसे कर रही हैं, मार्गारीटा निकोलायेव्ना?
 यह क्रीम का कमाल है! क्रीम का, क्रीम का! मार्गारीटा ने शीशे की ओर मुड़ते हुए सुनहरी डिब्बी की ओर इशारा किया.

नताशा गिरती हुई चीज़ों को भूलकर ड्रेसिंग टेबुल के निकट पड़ी उस डिब्बी की ओर ललचाई नज़रों से देखने लगी, जिसमें अभी भी थोड़ी-सी क्रीम बची थी. उसके होठ कुछ बुदबुदाने लगे. वह फिर मार्गारीटा की ओर मुड़ी और उसकी प्रशंसा करने लगी, ओह, आपका तन! त्वचा, हाँ? मार्गारीटा निकोलायेव्ना आपकी त्वचा चमक रही है! तभी उसे गिरी हुई पोशाक की याद आई. वह सँभल कर उसे झटकते हुए उठाने लगी.

फेंको! फेंको! मार्गारीटा चिल्लाई, भाड़ में जाए, फेंको! नहीं, ठहरो, उसे तुम मेरी याद की ख़ातिर रख लो. कहती हूँ रख लो, मेरी याद दिलाएगी. कमरे में जो कुछ है, सब ले लो.
नताशा पगला गई. स्तब्ध होकर उसने मार्गारीटा की ओर देखा, फिर उसे चूमते हुए उसकी गर्दन से लटक गई.

 शानदार! चमक रही है! शानदार! भँवें, ओह, भँवें!
 सारे चीथड़े उठा लो, सेंट-इत्र ले लो और अपने बक्से में रख लो, छिपा लो, मार्गारीटा चिल्लाई, मगर कीमती चीज़ें मत लेना, वर्ना तुम पर चोरी का इल्ज़ाम लगेगा.

नताशा ने जो हाथ लगा सब उठा लिया पोशाकें, जूते, स्टॉकिंग्ज़, अंतर्वस्त्र...और वह शयन- कक्ष से बाहर भागी.

मगर निकोलाय इवानोविच काफी ‘बोर’ किस्म का आदमी है. वह काफ़ी महत्वपूर्ण पद पर काम कर रहा था. उसे रोज़ सुबह दफ़्तर की गाड़ी घर से ले जाती थी और शाम को वापस घर छोड़ जाती थी.
अज़ाज़ेलो दस बजे फोन करके उसे बताता है कि उसे किस तरह से उड़ना है. मार्गारीटा उड़ने के लिए तैयार है!

तभी कमरे साफ़ करने का ब्रश, जो एक डण्डे पर लगा हुआ था, नाचता हुआ कमरे में आया. मार्गारीटा उड़ चली...अपनी नई-नई आज़ादी का लुत्फ उठाने...अपने प्यार से मिलने की उम्मीद लिए...



हम मार्गारीटा के साथ-साथ ही रहेंगे....