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गुरुवार, 15 मार्च 2012

Master aur Margarita - 26.3

 



मास्टर और मार्गारीटा 26.3


जूड़ा पीछे की ओर लड़खड़ाया और क्षीण आवाज़ में बोला, “आह!
दूसरे आदमी ने उसका रास्ता रोका.
पहले वाले ने, जो सामने था, जूडा से पूछा, “अभी कितना मिला है? बोलो, अगर जान बचाना चाहते हो!
जूडा के दिल में आशा जाग उठी और वह बदहवासी से किल्लाया, “तीस टेट्राडाख्मा! तीस टेट्राडाख्मा! जो कुछ भी पाया, सब यही है. ये रही मुद्राएँ! ले लीजिए, मगर मेरी जान बख़्श दीजिए.
सामने वाले आदमी ने जूडा के हाथ से झटके से थैली छीन ली. उसी क्षण जूडा की पीठ के पीछे बिजली की गति से चाकू चमका जिसने उस प्रेमी की पसलियों पर वार किया. जूडा आगे की ओर लड़खड़ाया, और अपनी टेढ़ी-मेढ़ी उँगलियों वाले हाथ उसने ऊपर उठा दिए. सामने वाले व्यक्ति के चाकू ने जूडा को थाम लिया और उसकी मूठ जूडा के दिल में उतर गई.
 नी... ज़ा...,” अपनी ऊँची, साफ़, जवान आवाज़ के बदले जूडा के मुँह से इतने ही शब्द एक नीची, डरी, उलाहने भरी आवाज़ में निकले और आगे वह कुछ न बोल सका. उसका शरीर पृथ्वी पर इतनी शक्ति से गिरा, कि वह गूँज उठी.
अब रास्ते पर एक तीसरी आकृति दिखाई दी. यह तीसरा कोट और टोपी पहने था.
 आलस मत करो,” तीसरे ने आज्ञा दी. हत्यारों ने फ़ौरन थैली के साथ वह कागज़ बाँध दिया, जो उन्हें तीसरे आदमी ने दिया था. वह सब एक चमड़े के टुकड़े में रखकर उस पर डोरी बाँध दी. दूसरे ने यह पैकेट अपनी कमीज़ में रख लिया. इसके बाद दोनों हत्यारे रास्ते से दूर हटकर चले गए और ज़ैतून के वृक्षों के बीच अँधेरा उन्हें खा गया. तीसरा, मृतक के पास उकडूँ बैठकर उसके चेहरे को देखता रहा. अँधेरे में वह चेहरा चूने की तरह सफ़ेद नज़र आ रहा था और बहुत सुन्दर लग रहा था. कुछ क्षणों पश्चात् रास्ते पर कोई भी जीवित व्यक्ति नहीं रहा. निर्जीव शरीर हाथ पसारे पड़ा रहा. बायाँ पैर चाँद की रोशनी में था, जिससे उसकी चप्पल का रहबन्द साफ़ दिखाई दे रहा था.
इस समय पूरा गेफ़सिमान उद्यान पंछियों के गीतों से गूँज उठा.
जूडा को मारने वाले दोनों हत्यारे कहाँ लुप्त हो गए, किसी को नहीं मालूम. मगर तीसरे, टोपी वाले के मार्ग के बारे में हम जानते हैं रास्ता छोड़कर वह ज़ैतून के वृक्षों के झुरमुट से होता हुआ दक्षिण की ओर बढ़ा. प्रमुख द्वार से कुछ पहले वह उद्यान की दीवार फाँद गया; उसके दक्षिणी कोने में, जहाँ बड़े-बड़े पत्थर पड़े थे. शीघ्र ही वह केद्रोन के किनारे पहुँचा. फिर पानी में उतरकर कुछ देर तक चलता रहा, जब तक कि उसे दो घोड़ों के साथ एक आदमी नहीं दिखाई दिया. घोड़े भी प्रवाह में ही खड़े थे. पानी उनके पैर धोते हुए बह रहा था. साईस एक घोड़े पर बैठा और टोपी वाला उछलकर दूसरे पर बैठ गया और वे धीरे-धीरे प्रवाह में ही चलते रहे. घोड़ों के खुरों के नीचे पत्थरों के चरमराने की आवाज़ आ रही थी. फिर घुड़सवार पानी से बाहर आए, येरूशलम के किनारे पर आए और शहर की दीवार के साथ-साथ चलते रहे. यहाँ साईस अलग हो गया और घोड़े को एड़ लगाकर आँखों से ओझल हो गया. टोपी वाला घोड़ा रोककर नीचे उतरा और उस निर्जन रास्ते पर उसने अपना कोट उतारा और उसे उलट दिया; कोट के नीचे से उसने एक चपटा, बिना परों वाला शिरस्त्राण निकाल कर पहन लिया. अब घोड़े पर उछल कर सवार हुआ, फौजी वेष में, कमर में तलवार लटकाए एक सैनिक. उसने रास खींची और फ़ौजी टुकड़ी का जोशीला घोड़ा तीर की तरह सवार को चिपकाए भागा. अब रास्ता थोड़ा सा ही था घुड़सवार येरूशलम के दक्षिणी द्वार की ओर बढ़ रहा था.
प्रवेश द्वार की कमान पर मशालों की परेशान रोशनी नाच रही थी. बिजली की गति वाली दूसरी अंगरक्षक टुकड़ी के सिपाही पत्थर की बेंचों पर बैठे चौपड़ खेल रहे थे. तीर की तरह आते फ़ौजी को देखते ही वे अपनी-अपनी जगहों से उछल पड़े, फ़ौजी ने उनकी ओर हाथ हिलाया और शहर में घुस गया.
शहर त्यौहार की चकाचौंध में डूबा था. सभी खिड़कियों में रोशनी खेल रही थी. चारों ओर से प्रार्थनाएँ गूँज रही थीं. बाहर खुलती खिड़कियों में  देखते हुए घुड़सवार कभी-कभी लोगों को पकवानों से सजी खाने की मेज़ पर देख सकता था. पकवानों में था बकरी का माँस, शराब के प्याले और कड़वी घास वाली कुछ और चीज़ें. सीटी पर कोई शांत गीत गुनगुनाते हुए घुड़सवार धीमी चाल से निचले शहर की खाली सड़कों पर चलते-चलते अंतोनियो की मीनार की ओर बढ़ा, कभी मन्दिर के ऊपर के उन पंचकोणी दीपों की ओर देखते हुए, जैसे दुनिया में और कहीं नहीं थे; या फिर चाँद को देखते हुए, जो इन पंचकोणी दीपों के ऊपर लटक रहा था.
इस त्यौहार की रात के आयोजनों में हिरोद के प्रासाद ने कोई हिस्सा नहीं लिया. दक्षिण की ओर खुलने वाले निचले कमरों में जहाँ रोम की सेना के अफ़सर और अश्वारोही टुकड़ियों के प्रमुख रखे गए थे, दीप जल रहे थे. वहाँ कुछ हलचल और जीवन के चिह्न दृष्टिगोचर हो रहे थे. सामने वाले भाग में बेमन से रह रहा महल का निवासी न्यायाधीश था. यह पूरा भाग अपने स्तम्भों और सुनहरी प्रतिमाओं समेत मानो चाँद की चमक से अन्धा हो गया था. महल के अन्दर ख़ामोशी और अन्धेरे का साम्राज्य था.
और जैसा कि न्यायाधीश ने अफ्रानी से कहा था, वह अन्दर जाना नहीं चाहता था. उसने वहीं बालकनी में ही बिस्तर लगाने की आज्ञा दी, वहीं, जहाँ उसने भोजन किया था और सुबह मुकदमा सुना था. न्यायाधीश बिस्तर पर लेटा मगर उसकी आँखों से नींद दूर थी. नंगा चाँद ऊपर साफ़ आसमान में लटक रहा था और कई घण्टों तक न्यायाधीश उस पर से आँखें न हटा सका.
करीब आधी रात को निद्रादेवी ने महाबली पर दया कर ही दी. कँपकँपाते हुए एक लम्बी जम्हाई लेकर न्यायाधीश ने अपना कोट निकालकर फेंक दिया, कमर में बँधा पट्टा खोल दिया, जिसमें खोलबन्द स्टील का चाकू लटका था, उसे बिस्तर के पास वाले आसन पर रख दिया, चप्पलें उतारीं और लेट गया. बांगा फ़ौरन उसके बिस्तर पर चढ़कर सिर के पास सिर रखकर उसकी बगल में लेट गया; न्यायाधीश ने कुत्ते की गर्दन पर हाथ रखकर अपनी आँखें बन्द कर लीं. तभी कुत्ता भी सोया.
बिस्तर आधे अँधेरे में था, स्तम्भ के कारण चाँद का प्रकाश उस पर नहीं पड़ रहा था, मगर सीढ़ियों से बिस्तर तक चाँद की रोशनी का पट्टा आ रहा था. जैसे ही न्यायाधीश ने वास्तविक जीवन की गतिविधियों से सम्बन्ध तोड़ा, वह फ़ौरन उस चमकीले रास्ते पर सीधे चाँद की ओर चलने लगा. सपने में खुशी के कारण वह मुस्कुरा रहा था, क्योंकि इस नीले-नीले रास्ते पर सब कुछ इतना अद्भुत और सुन्दर था. वह बांगा के साथ-साथ चल रहा था, और उसके साथ था वह घुमक्कड़ दार्शनिक. वे किसी जटिल और महत्त्वपूर्ण विषय पर बहस कर रहे थे, मगर कोई भी दूसरे को हरा नहीं पा रहा था. वे किसी भी बात में एक दूसरे के समान नहीं थे और इसी कारण उनकी बहस काफ़ी दिलचस्प हो गई थी और ख़त्म नहीं हो पा रही थी. ज़ाहिर था कि आज का मृत्युदण्ड सरासर बेवकूफ़ी थी यही दार्शनिक जो एक फ़ूहड़ ख़याल की हिमायत कर रहा था, कि सभी व्यक्ति दयालु होते हैं, उसके साथ-साथ चल रहा था, जिसका मतलब यह हुआ कि वह जीवित था. इस बात का ख़याल भी कितना भयानक है कि ऐसे व्यक्ति को सूली पर चढ़ाया जा सकता है. सूली दी ही नहीं गई! बिल्कुल नहीं दी गई! चाँद तक पहुँचने की यात्रा की यही सुखद अनुभूति है.
ख़ाली समय इतना था, जितना आवश्यक था, और तूफ़ान सिर्फ शाम को ही आएगा, और कायरता सबसे भयानक पापों में से एक है. यही कहा था येशू हा-नोस्त्री ने. नहीं दार्शनिक, मैं तुमसे सहमत नहीं हूँ: यह सर्वाधिक भयानक पाप है.
उदाहरण के लिए, जब देव घाटी में मदमस्त जर्मनों ने विशालकाय क्रिसोबोय को लगभग टुकड़े-टुकड़े कर दिया था, तब जूडिया के वर्तमान न्यायाधीश और घुड़सवार टुकड़ी के भूतपूर्व प्रमुख ने कायरता नहीं दिखाई थी. मगर, मुझ पर दया करो, दार्शनिक! क्या तुम, अपनी बुद्धिमत्ता से यह नहीं समझ सकते, कि सम्राट के विरुद्ध अपराध करने वाले व्यक्ति के कारण, जूडिया का न्यायाधीश अपनी नौकरी चौपट कर देता?
 हाँ हाँ,” नींद में ही पिलात कराहते और सिसकियाँ लेते हुए बोला. ज़ाहिर है, चौपट कर देता. दिन में शायद वह यह करता नहीं, मगर अब रात में, सब कुछ छोड़छाड़ कर, वह नौकरी चौपट करने की बात पर उतारू था, वह सब कुछ करने को तैयार था, जिससे इस सम्पूर्ण निरपराध व्यक्ति को, इस सिरफिरे दार्शनिक और चिकित्सक को मृत्यु से बचा सके.
 अब हम हमेशा साथ-साथ रहेंगे,” सपने में उस घुमक्कड़ दार्शनिक ने उससे कहा. न जाने कैसे वह सुनहरे भाले वाले घुड़सवार के रास्ते में खड़ा था. यदि एक है तो इसका मतलब है कि दूसरा भी वहीं है! मुझे याद करेंगे तो फ़ौरन तुम्हें भी याद करेंगे. मुझे लावारिस के, अनजान माता-पिता की संतान के रूप में, और तुम्हें भविष्यवेत्ता राजा और चक्की वाले की पुत्री, सुन्दरी पिला के पुत्र के रूप में.
 हाँ, तुम भूल न जाना, मुझे याद रखना, भविष्यवेत्ता के बेटे को,” सपने में पिलात ने प्रार्थना की और सपने में अपने साथ-साथ चलने वाले एन सारीदा के निर्धन के सिर हिलाकर स्वीकृति देने पर जूडिया का निर्दयी न्यायाधीश खुशी के मारे रो पड़ा और सपने में मुस्कुराता रहा!

यह सब बहुत अच्छा लग रहा था मगर इसी कारण महाबली की नींद का टूटना बहुत भयानक था. बांगा चाँद की ओर देखकर चिल्लाया और फिसलन भरा नीला रास्ता न्यायाधीश की आँखों से ओझल हो गया. उसने आँखें खोलीं और पहली बात जो उसे याद आई, वह यह कि दार्शनिक सूली पर चढ़ाया जा चुका था. उठते ही न्यायाधीश ने आदत के अनुसार बांगा की गर्दन को हाथ से सहलाया, तत्पश्चात् बीमार आँखों से चाँद को ढूँढ़ने लगा तो पाया कि वह कुछ किनारे की ओर हट गया है और सफ़ेद पड़ गया है. उसके प्रकाश को काटती हुई एक अप्रिय, बेचैन-सी रोशनी न्यायाधीश की आँखों के ठीक सामने बालकनी में खेल रही थी. यह मशाल थी जो क्रिसोबोय के हाथों में फड़फड़ाते हुए धुआँ उगल रही थी. उसे पकड़ने वाला भय और घृणा से उस ख़तरनाक जानवर के नज़दीक आ रहा था, जो उस पर छलाँग लगाने ही वाला था.
 छूना मत, बांगा,” न्यायाधीश ने बीमार आवाज़ में कहा और वह खाँसा. रोशनी से बचने के लिए हाथ ऊपर उठाते हुए उसने आगे कहा, “रात में भी, चाँद के नज़दीक भी मुझे चैन नहीं है. हे भगवान! तुम्हारा कर्त्तव्य भी बड़ा अप्रिय है, मार्क! सिपाहियों का तो तुम अंग-भंग कर देते हो...

                                                        क्रमशः

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