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गुरुवार, 12 जुलाई 2012

Discussion on Master & Margarita (Hindi) - 6



   अध्याय – 6

इवान बेज़्दोम्नी धमकी देता है कि वह बलपूर्वक इस मानसिक रुग्णालय में लाए जाने का विरोध करेगा. वह इस बात पर ज़ोर देता है कि वह पूरी तरह सामान्य है.

प्रोफेसर स्त्राविन्स्की का क्लिनिक शहर के बाहर नया नया खुला है. हम देखेंगे कि अधिकाधिक लोग वहाँ लाए जाएँगे.

अब ऋयूखिन को एहसास होता है कि इवान के चेहरे पर तो किसी भी मानसिक बीमारी का कोई लक्षण ही नहीं है. वह घबरा जाता है...

और इवान उस पर चिल्लाता है और कहता है, “और तुझे तो, जू के अण्डे, मैं देख लूँगा!”

इवान पर तो ऋयूखिन का भण्डा फोड़ करने की धुन सवार हो गई. वह कहता है कि उसमें कोई योग्यता ही नहीं है...यह मूढ़ साश्का, हालाँकि अपने आपको सर्वहारा वर्ग का कवि कहता है, मगर असल में है अव्वल दर्जे का कुलाक जिसने सर्वहारा वर्ग के कवि का नकाब पहन रखा है. मई-दिवस की वर्ष गाँठ के उपलक्ष में लिखी गई उसकी कविता की भी वह निन्दा करता है.
ऋयूखिन बहस नहीं करता, मगर जब वह इवान को अस्पताल में छोड़कर मॉस्को वापस लौट रहा था तो वह स्वीकार करता है कि वे शब्द जो इवान ने उस पर फेंके थे हालाँकि बड़े अपमानजनक थे, मगर थे एकदम सही.

बुल्गाकोव ने जिस प्रकार ऋयूखिन का चित्रण किया है, उससे पता चलता है कि उसका इशारा प्रसिद्ध क्रांतिकारी कवि व्लादीमिर मायाकोव्स्की की ओर है. निम्नलिखित वर्णन इस बात को स्पष्ट करने में सहायक है:

”इसकी मरियल कदकाठी की ओर ध्यान दीजिए और उसकी तुलना इसकी गरजदार कविता से कीजिए, जो इसने पहली मई के मौके पर लिखी है...’उठो!....और बिखर जाओ!’ और क्या यह अपने द्वारा लिखी गई कविता के एक भी शब्द पर विश्वास करता है? ज़रा उसके दिल में झाँक कर देखिए और आप चौंक जाएँगे यह देखकर कि वह क्या सोच रहा है!”

“मास्टर और मार्गारीटा” में हम अक्सर सभी घरों से, शहर के सभी कोनों से रेडिओ से आती हुई एक भारी-भरकम आवाज़ को सुनते हैं...यह मायाकोव्स्की की ही आवाज़ है.

बुल्गाकोव और मायाकोव्स्की एक दूसरे को पसन्द नहीं करते थे और एक दूसरे की खिंचाई करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते थे. मायाकोव्स्की ने अपने नाटक ‘खटमल’ के एक दृश्य में बुल्गाकोव का मज़ाक उड़ाया है यह कहकर कि उसका नाम सिर्फ पुरातन शब्दों के शब्दकोष में ही पाया जाता है.

बुल्गाकोव ने भी मायाकोव्स्की को कभी छोड़ा नहीं...

मगर मॉस्को वापस लौटते समय ऋयूखिन अपनी परिस्थिति का विश्लेषण करता है और उसे इस बात का एहसास हो जाता है कि उसका जीवन व्यर्थ हो चुका है और अब उसे सुधारने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता. “मैं 32 वर्ष का हूँ, और आगे क्या? शायद मैं हर साल कुछ कविताएँ लिखता रहूँ...फिर क्या? कब तक? बुढ़ापे तक? इन कविताओं से उसे मिला ही क्या है? प्रसिद्धी? ओह, कम से कम अपने आप को तो धोखा न दो....प्रसिद्धी कभी उनके कदम नहीं चूमती जो वाहियात किस्म की, बेवकूफी भरी कविताएँ लिखते हैं. वे कविताएँ वाहियात क्यों हैं? जो कुछ भी मैं लिखता हूँ, उसके एक भी शब्द पर मैं विश्वास नहीं करता! ज़िन्दगी में अब कुछ भी सुधारना मुमकिन नहीं है...वह बरबाद हो गई है!”

फिर ऋयूखिन को लेकर आ रहा ट्रक एक स्मारक के पास रुकता है...पाषाण का बना हुआ एक आदमी सिर झुकाए खड़ा है, “ये है वास्तविक, सम्पूर्ण सफलता का उदाहरण! जो कुछ भी उसने किया, चाहे जिस परिस्थिति में भी उसे धकेला गया, हर चीज़ ने उसे प्रसिद्धी ही प्रदान की! वर्ना कैसा सम्मोहन है इन शब्दों में, ‘तूफ़ानी धुँध...’? और उस श्वेत सैनिक ने उसे मार डाला और अमर बना दिया...

यह ज़िक्र है पूश्किन के बारे में...

तो, बुल्गाकोव ने बीसवीं शताब्दी के दूसरे-तीसरे दशकों की साहित्यिक झलक दिखला दी है और उसकी तुलना उन्नीसवीं शताब्दी के साहित्य से करके यह दिखा दिया है कि वह कौन सी चीज़ है जो कविता को अमर बना देती है!

कृपया ध्यान दीजिए कि हमारे घटनाक्रम का पहला दिन यहाँ समाप्त होता है. ये सप्ताह का कौन सा दिन है, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है. घटनाक्रम पत्रियार्शी तालाब के किनारे बने पार्क में और उसके आसपास तथा ग्रिबोयेदोव भवन में घटित होता है फिर वह मॉस्को के सीमावर्ती भाग में बने स्त्राविन्स्की क्लिनिक में स्थानांतरित हो जाता है. इवान को ‘शिज़िफ्रेनिया’ का मरीज़ बता दिया जाता है...तो इस तरह रहस्यमय प्रोफेसर की दोनों भविष्यवाणियाँ सही साबित होती हैं.


इवान को इस अस्पताल के कमरा नं. 117 में रखा जाता है और हम देखेंगे कि शीघ्र ही उसके आसपास और कई लोग आ जाते हैं.

मंगलवार, 10 जुलाई 2012

Discussion on M&M(Hindi) - Chapter 5


अध्याय - 5            
                                                                                                                                                   
इस अध्याय का शीर्षक है “सारा मामला ग्रिबोयेदोव में ही था”.

ग्रिबोयेदोव भवन का, जहाँ मासोलित का कार्यालय स्थित था, विस्तार से वर्णन किया गया है. बुल्गाकोव बताते हैं कि इस भवन में क्या क्या होता था...जैसे कि मासोलित के सदस्यों को हरसम्भव बेहतरीन सुविधाएँ प्रदान करना, जिनमें शामिल था बेहतरीन खाना, लेखकों की बस्ती पेरेलीगिनो में आवास प्रदान करना, साहित्य की रचना करने के लिए मुफ्त यात्रा एवम् अवकाश...संक्षेप में ये वो जगह थी जहाँ प्रोलेटेरियन लेखकों का ‘पालन-पोषण’ किया जाता था. उन्हें समाज से दूर रखा जाता था और उनकी बेहतरीन आवभगत की जाती थी. मासोलित का पहचान-पत्र रखना बड़े गर्व की बात समझी जाती थी.

आइए, अब कुछ और चीज़ों की ओर चलते हैं:

इस भवन को ग्रिबोयेदोव का नाम क्यों दिया गया? बुल्गाकोव कहते हैं कि यह घर प्रख्यात लेखक ग्रिबोयेदोव की बुआ का था और वह अपने नाटक ‘बुद्धि से दुर्भाग्य’ के अंश इस बुआ को पढ़कर सुनाया करता था, जो स्तम्भों वाले हॉल में सोफे पर पड़े-पड़े उन्हें सुना करती थी. मगर बुल्गाकोव फौरन ही अपने इस कथन को नकार देते हैं और कहते हैं, “हमें मालूम नहीं कि ग्रिबोयेदोव की कोई ऐसी बुआजी भी थीं जो इतने विशाल प्रासाद की मालकिन थीं,” और आगे कहते हैं, “ऐसी कोई बुआजी थीं या नहीं, हमें मालूम नहीं...वह अपने नाटक के अंश उन्हें पढ़कर सुनाया करता था या नहीं, हम विश्वास के साथ नहीं कह सकते...हो सकता है उसने पढ़े हों, हो सकता है, नहीं भी पढ़े हों.”

यह भी उस प्रसंग  जैसा है जब बेर्लिओज़ प्रोफेसर से कहता है कि हालाँकि उसकी कहानी है तो बड़ी दिलचस्प मगर वह पवित्र बाइबल में दिए गए प्रसंग से मेल नहीं खाती...पाठक को फौरन यह आभास हो जाता है कि येशुआ – पोन्ती पिलात प्रसंग वास्तविक ईसा के बारे में नहीं है!
यही बात यहाँ भी है.

मगर फिर ‘ग्रिबोयेदोव’ क्यों? जिस बिल्डिंग का ज़िक्र हो रहा है, वह वास्तव में है ‘गेर्त्सेन-भवन’... बुल्गाकोव ने इसे ग्रिबोयेदोव-भवन का नाम दे दिया. फिर वही बात: बुद्धि से / विचार प्रक्रिया से
सम्बन्धित. ग्रिबोयेदोव के नाटक ‘बुद्धि से दुर्भाग्य’ में इस बात का वर्णन है कि किस प्रकार एक पढ़ा-लिखा/ बुद्धिमान/ तर्कपूर्ण विचार करने वाला नौजवान अनपढ़ लोगों के समाज में दुख पाता है. यहाँ यही बात बुल्गाकोव के तत्कालीन समाज (साहित्यिक समाज) पर लागू होती है.

तो, इवान बेज़्दोम्नी ग्रिबोयेदोव भवन पहुँचता है प्रोफेसर की तलाश में...

वहाँ बारह लेखक (बारह शिष्य!) मीटिंग के लिए बेर्लिओज़ का इंतज़ार कर रहे हैं...एक छोटे, उमस भरे कमरे में और बेर्लिओज़ को देर करने के लिए कोसते हुए अपनी खीझ उतारते हैं.

और जब ग्रिबोयेदोव का प्रसिद्ध ‘जाज़’ आरम्भ हो जाता है, तो वे कुछ खाने के लिए नीचे आ जाते हैं. अचानक बेर्लिओज़ की मृत्यु की खबर फैल जाती है. जाज़ रुक जाता है, लोग कुछ समय के लिए खाना और पीना बन्द कर देते हैं, मगर धीरे-धीरे फिर से शुरू हो जाते हैं, यह कहते हैं हम कर भी क्या सकते हैं? वोद्का क्यों फेंकी जाए? वह मर गया मगर हम तो ज़िन्दा हैं और ज़िन्दा रहने के लिए हमें खाना पीना तो पड़ेगा ही. एक कड़वा सच!

ग्रिबोयेदोव भवन के मैनेजर की ओर ध्यान दीजिए. बुल्गाकोव कहते हैं और फौरन अपनी बात को नकार भी देते हैं कि पूर्व में वह एक समुद्री डाकू था! मगर उन लोगों की पृष्ठभूमि पर गौर करना दिलचस्प होगा जो सर्वहारा साहित्य की रचना कर रहे हैं / सर्वहारा वर्ग के लेखकों का संरक्षण कर रहे हैं.

हास्यास्पद पोषाक में इवान को ग्रिबोयेदोव भवन में ईसा की तस्वीर और जलती हुई मोमबत्ती लिए प्रवेश करते देखकर लोगों की क्या प्रतिक्रिया होती है इस पर गौर कीजिए. गौर कीजिए कि मैनेजर आर्किबाल्ड आर्किबाल्डोविच इवान को इस हालत में ग्रिबोयेदोव भवन में घुसने देने के लिए चौकीदार को किस तरह डाँटता है; उस फूले-फूले चेहरे पर भी गौर कीजिए जो इवान के ठीक कान में पुचकारते हुए उससे रहस्यमय प्रोफेसर का नाम पूछता है. कवि ऋयुखिन की ओर भी गौर फरमाइए.

ऋयुखिन के बारे में अगले अध्याय में.

इस अध्याय के समाप्त होते होते इवान को तौलियों में लपेटकर एक ट्रक में डॉक्टर स्त्राविन्स्की के क्लीनिक में ले जाया जाता है, जिसके बारे में भी रहस्यमय प्रोफेसर ने पत्रियार्शी पार्क में भविष्यवाणी कर दी थी.

सोमवार, 9 जुलाई 2012

Discussion on Master&Margarita(Hindi)-4


  अध्याय -4

हम कह सकते हैं कि अध्याय 4 से मॉस्को में शैतान की गतिविधियों का आरंभ हो जाता है.
जैसे ही बेज़्दोम्नी ने पहली चीख सुनी, वह निर्गम द्वार की ओर भागा और उसने पत्रियार्शी पार्क की जाली के पास बेर्लिओज़ के कटे हुए सिर को लुढ़कते हुए देखा.

उसे मानो पक्षाघात जैसी कोई चीज़ हो गई और वह वहीं पड़ी एक बेंच पर लुढ़क गया. वह हिल नहीं पा रहा था. जैसे ही पहली चीखें कुछ थमीं, उसने निकट ही दो औरतों को इस दुर्घटना के बारे में बात करते सुना, उनमें से एक कह रही थी, “ अन्नूश्का! हमारी अन्नूश्का!! उसने एक लिटर सूरजमुखी का तेल खरीदा, मगर बोतल घुमौने दरवाज़े से टकराकर टूट गई, पूरा तेल ज़मीन पर बिखर गया. और वह बेचारा गरीब, उस पर से फिसलकर रेल की पटरियों पर गिर पड़ा.”

बेज़्दोम्नी के दिमाग में मानो घण्टियाँ बजने लगीं! अन्नूश्का! सूरजमुखी का तेल! मीटिंग! पोन्ती पिलात! प्रोफेसर!

इवान बेज़्दोम्नी इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि प्रोफेसर को बेर्लिओज़ की मृत्यु के बारे में सब कुछ पता था....शायद उसीने तो इस दुर्घटना की प्लानिंग नहीं की!!?? वह उस बेंच की ओर आया जिस पर कुछ देर पहले प्रोफेसर के साथ बैठा था, और उसने उसी लम्बे, पतले, चौखाने की कमीज़ वाले आदमी को प्रोफेसर के साथ बैठे देखा, जिसने बेर्लिओज़ को बाहर का रास्ता बताया था. अब उसने ऐनक पहन रखी थी जिसका एक काँच टूटा हुआ था!
यह व्यक्ति उपन्यास के महत्त्वपूर्ण पात्रों में से एक है. इवान उससे प्रार्थना करता है कि वह अपराधी को पकड़ने में उसकी मदद करे.....खैर, यह सब तो आपने पढ़ ही लिया होगा.

 अब हम देखेंगे कि किस तरह इवान उनका पीछ करता है....

इवान इस त्रोयका का पीछा कर रहा है...प्रोफेसर, पतला लम्बू, और एक विशालकाय बिल्ला जो न जाने कब और कहाँ से आकर उनके साथ मिल गया था.

कुछ छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान दीजिए...

बिल्ला ट्राम में घुसकर कण्डक्टर को टिकट के पैसे दे रहा है; कण्डक्टर ने सिर्फ इतना ही कहा कि बिल्लियों को ट्राम में सफर करने की इजाज़त नहीं है, मगर किसी ने भी...किसी ने भी इस बात की ओर ध्यान नहीं दिया कि यह बिल्ला कण्डक्टर को पैसे दे रहा था!

प्रोफेसर का पीछा करते-करते इवान ने न जाने क्यों सोच लिया कि हो न हो प्रोफेसर बिल्डिंग नं. 13 के फ्लैट नं. 47 में है. यह एक ऐसी बिल्डिंग थी जो क्रांति से पहले कुलीन वर्ग के व्यक्ति की थी और जिसे क्रांति के बाद सार्वजनिक आवास में बदल दिया गया था. बिल्डिंग के भीतर की गई तोड़-फोड़, धूल, गन्दगी, आम-रसोईघर जिसमें ईसा की एक कागज़ की तस्वीर और एक मोमबत्ती लटक रही थी,..गुसलखाने में साबुन के फेन में लिपटी नहाती हुई औरत जो गलती से भीतर घुस आए इवान को अपना प्रेमी समझ बैठी और उसे झिड़कते हुए बाहर जाने के लिए कहने लगी, क्योंकि उसके पति के घर लौटने का समय हो चुका था... सभी खिड़कियों से झाँकते एक से नारंगी शेड वाले लैम्प, एक ही तरह का संगीत, एक चिल्लाती हुई, गुस्से भरी आवाज़ जो एव्गेनी अनेगिन से एक प्रेम गीत गा रही है (यह गुसैल, चीखती हुई आवाज़ उपन्यास में कई बार, अनेक जगहों पर सुनाई देती है!)...आपको 20 के दशक के मॉस्को के दर्शन हो जाते हैं!          


फिर होती है एक दिलचस्प बात...


जब इवान यह सोचकर मॉस्को नदी में छलांग लगाता है कि प्रोफेसर उसीमें है...

पानी बेहद ठण्डा था, नदी के पानी में आने जाने वाले स्टीमरों के कारण तेल बिखरा हुआ है, इवान के कपड़े चोरी हो जाते हैं, सिर्फ वह मोमबत्ती और ईसा की तस्वीर वहाँ छोड़ दी जाती है, और वह किसान, जिसे इवान ने अपने कपड़े थमाए थे, अपना ढीला ढाला कुर्ता और ऊँची-ऊँची पतलून वहाँ छोड़ जाता है. इवान के सामने इन कपड़ों को पहनने के अलावा कोई और चारा नहीं था. वह कमीज़ पर सामने की ओर पिन से ईसा की तस्वीर टाँक लेता है और दूसरे हाथ में मोमबत्ती पकड़ लेता है. इस वेशभूषा में वह चल पड़ता है ग्रिबोयेदोव भवन की ओर रहस्यमय प्रोफेसर की तलाश में.

क्या हम ऐसा समझ सकते हैं कि तेल मिश्रित पानी में नहाने के बाद इवान का शुद्धीकरण हो गया है? उसने ईसा की तस्वीर को अपना लिया है, क्या उसका बाप्तिज़्मा हो गया है? कुछ लोग इस बात पर विचार कर सकते हैं, मगर हम सिर्फ इस बात पर गौर करेंगे कि इवान की सोच में, उसके नज़रिए में परिवर्तन आ गया है. अब वह काफी चीज़ों को जानने लगता है जिन पर पहले उसका ध्यान नहीं जाता है, जिन्हें वह कोई महत्त्व नहीं देता था.

अगले अध्याय में मॉस्को के साहित्यिक जीवन के बारे में काफी कुछ जानकारी दी गई है.

बुधवार, 4 जुलाई 2012

Discussion on Master & Margarita(Hindi) - 3


अध्याय – 3

हमने देखा कि अध्याय 2 में विदेशी पत्रियार्शी पार्क में येशुआ-हा-नोस्त्री और पोंती पिलात का प्रसंग सुनाता है, जिसमें येशुआ को फाँसी की सज़ा सुनाई जाती है. और जब तक अभियुक्तों को गंजे पहाड़ पर ले जाया जाता है सुबह के दस बज जाते हैं.

अध्याय 2 का घटनाक्रम घटित होता है येरूशलम में.

अध्याय 3 उसी वाक्य से आरम्भ होता है जिससे अध्याय 2 समाप्त हुआ था.  दुबारा यह कहकर कि ‘  ‘ सुबह के दस बजे थे, आदरणीय इवान निकोलायेविच... ’ बुल्गाकोव पाठकों को उस स्थान एवम समय पर वापस ले आता है जब बेर्लिओज़ और बेज़्दोम्नी ईसा के बारे में चर्चा कर रहे थे. 

इस विधा का प्रयोग बुल्गाकोव स्थान एवम् समय में मानो छलाँग लगाने के लिए करते हैं.

इस समय तक पत्रियार्शी पर शाम हो चुकी है और आसमान में चाँद निकल आया है. बेर्लिओज़ इस ‘सिरफिरे’ जर्मन को गुस्सा नहीं दिलाना चाहता मगर फिर भी वह कह देता है कि प्रोफेसर की कहानी है तो बड़ी दिलचस्प मगर वह बाइबल की कहानियों से मेल नहीं खाती. प्रोफेसर बेर्लिओज़ द्वारा ही कुछ समय पहले कहे गए शब्दों को दुहरा देता है कि बाइबिल में वर्णित घटनाएँ असल में कभी हुई ही नहीं. बेर्लिओज़ भौंचक्का रह जाता है.

गौर कीजिए कि इस बात को कहकर बुल्गाकोव इस बात की ओर इशारा कर देता है कि पाठक येशुआ-पोंती पिलात के प्रसंग को वाक़ई में ईसा की कहानी न समझ बैठें.....ये तो कोई और ही बात है!

बेर्लिओज़ प्रोफेसर से पूछता है कि वह मॉस्को में रुका कहाँ है, और प्रोफेसर जवाब देता है कि वह बेर्लिओज़ के ही फ्लैट में पूरे तीन दिनों तक रहने वाला है!

वह विचित्र, पारदर्शी आदमी जिसे बेर्लोओज़ ने पार्क में हवा से बनते देखा था, दुबारा प्रकट होता है. अब वह साधारण इंसान की तरह प्रतीत हो रहा है. वह बेर्लिओज़ से, जो विदेशियों से सम्बन्धित दफ़्तर में प्रोफेसर के बारे में सूचना देने जा रहा था, पूछता है कि क्या वह कीएव में उसके चाचा को तार कर दे?

इस तरह हमें दो बातों का पता चलता है : वह स्थान जहाँ विदेशी रुकने वाला है; और यह कि बेर्लिओज़ का एक चाचा है जो कीएव में रहता है.

बेर्लिओज़ अन्नूश्का द्वारा गिराए गए तेल पर फिसल कर रेल की पटरियों पर गिर जाता है और फौरन तेज़ी से आती हुई ट्राम द्वारा कुचल दिया जाता है. ट्राम एक महिला द्वारा चलाई जा रही थी.

इस प्रकार प्रोफेसर की भविष्यवाणी सही साबित होती है: मासोलित की मीटिंग जिसकी अध्यक्षता बेर्लिओज़ करने वाला था हो ही नहीं सकती; बेर्लिओज़ का सिर काट दिया जाता है, एक महिला द्वारा.

अगले ही पल लोगों की भीड़ जमा हो गई जो बेर्लिओज़ के कटॆ हुए सिर को देखकर सक्ते में आ गए थे.

हम कह सकते हैं कि यह अध्याय आगे होने वाली घटनाओं की प्रस्तावना है.

यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रोफेसर भविष्यवेत्ता है, यह भी यक़ीन हो जाता है कि मनुष्य का अपने भविष्य पर कोई नियंत्रण नहीं है, वह तो यह भी नहीं जानता है कि अगले पल उसके साथ क्या होने वाला है.


बेज़्दोम्नी की क्या प्रतिक्रिया होगी?

अगले अध्याय में....

सोमवार, 2 जुलाई 2012

Discussion on Master & Margarita(Hindi) - 2.5


अध्याय – 2.5

हम देखते हैं कि इस अध्याय में 4 प्रमुख पात्र हैं:

पोन्ती पिलात, जो येरूशलम में सम्राट सीज़र का प्रतिनिधि है;

येशुआ-हा-नोस्त्री जिस पर यह इल्ज़ाम लगाया गया है कि उसने लोगों को येरूशलम का मन्दिर नष्ट करने के लिए उकसाया है;

मार्क क्रिसोबोय, सुरक्षा बलों का प्रमुख जो सबसे ऊँचे सैनिक से भी ऊँचा है;

कैफ, जो धर्म गुरू है.

मगर  दो अन्य पात्र भी हैं, जिन के बारे में कुछ वर्णन इस अध्याय में मिलता है:
सीज़र और काला टोप पहना आदमी, जिससे पिलात कुछ क्षणों के लिए अन्धेरे कमरे में मिलता है.
सीज़र येरूशलम में उपस्थित नहीं है, मगर उनकी उपस्थिति का आभास सदैव होता रहता है.

इसीलिए जब येशुआ पर दूसरा इल्ज़ाम लगाया जाता है – महान सम्राट के प्रति अनादर प्रदर्शित करने का – तो पिलात समझ जात हि कि वह हा-नोस्त्री को अवश्य्म्भावी मृत्यु से नहीं बचा पाएगा. वह येशुआ को इशारों से बताने की कोशिश करता हि कि वह इस इलज़ाम से इनकार कर दे, मगर येशुआ स्वीकार करता है कि उसने लोगों को राजाओं के शासन के बारे में बताया है : सरकार लोगों पर ज़्यादती करने का साधन ही तो है...और एक ऐसा समय आएगा जब धरती पर कोई शासक नहीं बचेगा और विश्व सत्य और न्याय के साम्राज्य में प्रवेश कर जाएगा.

बस, यहीं सब कुछ समाप्त हो गया.

पिलात निचली अदालत द्वारा येशुआ को दिए गए मृत्यु दण्ड की पुष्टि करता है और अपने हाथ मलता है, जैसे उन्हें धो रहा हो.

पिलात सीज़र से डरता है, जबकि कैफ सीज़र से पिलात की शिकायत करने का कोई मौका नहीं छोड़ता. पिलात जो प्रशासनिक प्रमुख है, और कैफ, जो सैद्धांतिक/राजनैतिक प्रमुख है, एक दूसरे से बेहद घृणा करते हैं. मगर साथ ही, वे सावधान भी हैं कि कोई उनकी बातें न सुन ले. कैफ चाह्ता है कि येशुआ को मौत की सज़ा दे दी जाए, जबकि पिलात उसे बचाना चाहता हि, मगर उसे एहसास हो जाता है कि वह ऐसा नहीं कर पाएगा.

पवित्र बाइबल में इस बात का उल्लेख नहीं है कि पिलात के मन में येशुआ के प्रति किन्हीं कोमल भावनाओं का जन्म हुआ था.

सीज़र के चित्रण पर ध्यान दीजिए. उसके माथे के फोड़े पर...

इन बिन्दुओं पर हम अध्याय 16, 25 और 26 के बारे में चर्चा करते समय सोचेंगे.

Discussion on Master & Margarita (Hindi) - 2.4.


अध्याय – 2.4  

 ‘तभी शस्त्रधारी सैनिक लगभग 27 वर्ष के नवयुवक को पकड़ कर लाए. उसने फटा-पुराना लम्बा नीला चोगा पहना था, सिर पर सफ़ेद रूमाल बन्धा था...’

तो, येशुआ-हा-नोस्त्री की आयु 27 वर्ष बताई गई है...पवित्र बाइबल में ईसा की आयु बताई गई है 33 वर्ष ...

येशुआ नीले रंग की पोषाक में है, पवित्र बाइबल के अनुसार उनकी पोषाक का रंग था काला...येशुआ कहता है कि उसे अपने माता-पिता की याद नहीं, कहता है कि वे सीरियाई थे...यह भी बाइबल की कथा से दूर हट गया है.

हा-नोस्त्री पर आरोप लगाया गया है कि उसने येरूशलम में लोगों को मन्दिर नष्ट करने के लिए उकसाया...येशुआ जवाब देता है कि उसने किसी को इस काम के लिए नहीं उकसाया. उसने यह भी कहा कि पुराने विश्वासों का मन्दिर एक दिन ढह जाएगा और इसके स्थान पर सत्य का एक नया मन्दिर बनेगा.

यह सब स्थानीय वैचारिक/ धार्मिक व्यवस्था के, जिसका नेतृत्व कैफ करता था, विरुद्ध जा रहा था.
कैफ और पोंती पिलात के बीच किस प्रकार के सम्बन्ध हैं उन पर ध्यान दीजिए...

वे एक दूसरे से घृणा करते हैं. कैफ ने सम्राट से पिलात के विरुद्ध शिकायत की थी. अध्याय 2 में यह बताया गया है कि असल में पिलात येशुआ को बचाना चाहता था. वह उसे येरूशलम से दूर ले जाकर अपने साथ रखना चाहता था. मगर कैफ ज़िद पर अड़ा था कि येशुआ को फाँसी पर लटकाया जाए.

येशुआ को मृत्यु दण्ड सुनाकर पिलात अपने हाथ मलता है जैसे उन्हें धो रहा हो. यही प्रक्रिया आगे के एक और अध्याय में भी दोहराई जाएगी.

आगे...

रविवार, 1 जुलाई 2012

Discussion on Master & Margarita (Hindi) - 2.3


 अधाय – 2.3

चलिए, अब अध्याय 2 के दो अन्य पात्रों की ओर चलें. हम देख चुके हैं कि मार्क क्रिसोबोय सुरक्षा प्रमुख है. देखिए, उसका वर्णन किस प्रकार किया गया है:

क्रिसोबोय बड़ा हट्टा-कट्टा, अत्यंत शक्तिशाली व्यक्ति था. उसका चेहरा विद्रूप था. जैसे ही वह बाल्कनी में आया, ऐसा लगा, मानो अँधेरा छा गया हो. क्रिसोबोय अपनी सैन्य टुकड़ी के सबसे ऊँचे सैनिक से भी लगभग एक सिर के बराबर ऊँचे थे. उनके कन्धे इतने चौड़े थे कि उन्होंने अभी-अभी उदित हुए सूर्य को पूरी तरह ढँक लिया था.

इसी अध्याय में हम सूर्य को क्रमश: प्रखर होते देखेंगे...बाद के अध्यायों में भी सूर्य की निर्ममता का वर्णन है. मगर अध्याय 2 के आरम्भ में क्रिसोबोय सूर्य से अधिक ताकतवर है, क्योंकि सूर्य अभी ऊपर नहीं आया है! इसका तात्पर्य यह हुआ कि सुरक्षा तंत्र बहुत शक्तिशाली था और उन्होंने सूर्य द्वारा प्रदर्शित शक्तिशाली व्यक्तियों को भी ग्रहण लगा दिया था...धीरे-धीरे हम जानेंगे कि मिखाइल बुल्गाकोव का इशारा किस ओर है.

अब आइए येशुआ की ओर. पूरा नाम, जो उन्हें दिया गया है, वह है येशुआ-हा-नोस्त्री.  उसे लाया जाता है  येरूशलम के न्यायाधीश के सम्मुख. आसपास का परिवेष यह सुझाता है कि यह ईसा मसीह पर चलाया जा रहा मुकदमा है...मगर...यही तो है बुल्गाकोव का कमाल! वे यत्र-तत्र कुछ ऐसी बातों की ओर इशारा कर देते हैं कि हमें यकीन होने लगता है कि ये वास्तव में वो नहीं है.


येशू की ओर ध्यान दीजिए...उसकी उम्र, जो बुल्गाकोव द्वारा बताई जाती है, उसकी वेशभूषा, पोन्ती पिलात द्वारा उससे पूछे गए प्रश्न और येशू द्वारा दिए गए जवाब. यह जानने की कोशिश कीजिए कि वे पवित्र बाइबल में दिए गए वर्णन से किस तरह भिन्न हैं.


आगे की चर्चा इसके बाद!